July 7, 2026

Poem

समेट लुंगा मुट्ठी में तारामैं तो खुला आकाश लुंगामंज़ील में पहूंचने से पहलेन कभी अवकाश लंगा। देशहित...
आजादी की अमृत बेला,मना रहे भारतवासी, जबकि,आधी जनता देखोआज भी है भूखी-प्यासी।। .लोक तंत्र के नाम पे...